नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि गाड़ी मालिक से यदि कोई व्यक्ति वाहन किराये पर लेता है तो वाहन के साथ उसका भी इंश्योरेंस ट्रांसफर माना जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला बस दुर्घटना से जुड़ी एक याचिका पर सुनाया है। आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के बाद अब बीमा कंपनियों अब इंश्योरेंस का पैसा देने से आना-कानी नहीं कर सकेंगी।
अदालत ने कहा कि किराये पर लिए गए वाहन की अवधि के दौरान बस दुर्घटना मामले में बीमा कंपनी मुआवजा देने से नहीं बच सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बस मालिक ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को एग्रिमेंट के तहत बस किराये पर दी थी। जिसे तय किए गए रूट पर चलाना था।
दरअसल, 25 अगस्त 1998 के दिन हुए बस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। जिसके बाद परिजनों ने मुआवजे के लिए बहराइच के मोटर दुर्घटना क्लेम अधिकरण में अर्जी दाखिल की थी। जिसके बाद बीमा कंपनी को कहा गया था कि परिजनों को 1 लाख 82 हजार रुपए के साथ-साथ 6 फीसदी ब्याज दी जाए। लेकिन बीमा कंपनी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रूख कर लिया था।
इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि थर्ड पार्टी के मुआवजे की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की नहीं है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। जहां पर अदालत ने साफ कर दिया कि बीमा कंपनी मुआवजा देने से नहीं बच सकती है। इतना ही नहीं अदालत ने बीमा कंपनी को बस हादसे में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 1 लाख 82 हजार रुपए मुआवजा और 6 फीसदी ब्याज देने भी अदा करने का निर्देश दिया।
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