स्वास्थ्य Archives : News Hindi Samachar https://newshindisamachar.com/category/health/ News Hindi Samachar Wed, 22 Jul 2026 10:29:43 +0000 en-US hourly 1 https://newshindisamachar.com/wp-content/uploads/2021/02/cropped-logo-32x32.png स्वास्थ्य Archives : News Hindi Samachar https://newshindisamachar.com/category/health/ 32 32 191677313 कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह https://newshindisamachar.com/the-risk-of-heart-diseases-is-increasing-at-a-young-age-know-which-habits-are-becoming-the-reason/ Wed, 22 Jul 2026 10:29:43 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68963 आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना […]

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आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दैनिक आदतों में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियां और तेजी से बढ़ सकती हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, आनुवंशिक कारणों के अलावा हमारी रोजमर्रा की कई गलत आदतें दिल को नुकसान पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। घंटों बैठे रहना, जंक फूड का अधिक सेवन, धूम्रपान, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे-धीरे हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कम उम्र से ही हार्ट हेल्थ पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में सबसे अधिक मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं। भारत में भी बदलती जीवनशैली, मोटापा, तनाव और डायबिटीज जैसी समस्याओं ने हृदय रोगों का खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

बढ़ रहा है हृदय रोगों का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमा होने लगता है या ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा रहता है, तो हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार ये समस्याएं लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती हैं।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक अध्ययन में भी सामने आया है कि भारत के अधिकांश वयस्कों में कोलेस्ट्रॉल या रक्त में फैट का कम से कम एक स्तर सामान्य सीमा से बाहर पाया गया, जो भविष्य में हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

किन आदतों से बढ़ता है खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सामान्य दिखने वाली आदतें धीरे-धीरे दिल को कमजोर कर सकती हैं।

लंबे समय तक बैठे रहना: लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करने से शरीर की कैलोरी कम खर्च होती है, जिससे मोटापा, हाई ब्लड शुगर और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। इससे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन: पिज्जा, बर्गर, पैकेट वाले स्नैक्स और तले-भुने खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट अधिक होता है। इनका नियमित सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को बढ़ा सकता है।

तंबाकू और धूम्रपान: सिगरेट या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

व्यायाम की कमी: नियमित शारीरिक गतिविधि न करने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की या मध्यम एक्सरसाइज दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

लगातार तनाव: लंबे समय तक मानसिक तनाव रहने से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पर्याप्त नींद न लेना: रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद न मिलने पर हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

नियमित जांच भी है जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं अक्सर बिना किसी लक्षण के विकसित होती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्टों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)

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उत्तराखण्ड में 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन सेवा फिर हुई सक्रिय, आज से 24×7 शुरू हुई स्वास्थ्य सहायता https://newshindisamachar.com/health-helpline-service-104-reactivated-in-uttarakhand-24x7-health-assistance-begins-today/ Tue, 14 Jul 2026 08:29:04 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68731 आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण, प्रदेशवासियों को पूर्ववत 24×7 मिलेंगी स्वास्थ्य सेवाएं   देहरादून : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखण्ड के अंतर्गत संचालित 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं आवश्यक तकनीकी एवं विद्युत संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद आज से पुनः शुरू हो गई । हेल्पलाइन पूर्व की […]

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आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण, प्रदेशवासियों को पूर्ववत 24×7 मिलेंगी स्वास्थ्य सेवाएं

 

देहरादून : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखण्ड के अंतर्गत संचालित 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं आवश्यक तकनीकी एवं विद्युत संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद आज से पुनः शुरू हो गई । हेल्पलाइन पूर्व की भांति 24 घंटे और सातों दिन संचालित रहेगी। इसके माध्यम से प्रदेश के नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, आवश्यक जानकारी, शिकायत एवं अन्य निर्धारित सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

डॉ. अरीता सक्सेना, नोडल अधिकारी, 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन में मुख्य विद्युत आपूर्ति से संबंधित आर्मर्ड केबल के प्रतिस्थापन के साथ आवश्यक तकनीकी उन्नयन का कार्य किया गया है। तकनीकी कार्यों के चलते हेल्पलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुई थीं। अब सभी आवश्यक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं और हेल्पलाइन को नियमित संचालन के लिए तैयार कर लिया गया है।

तकनीकी उन्नयन और विद्युत संबंधी कार्य हुए पूरे

डॉ. अरीता सक्सेना, नोडल अधिकारी, 104 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड के अनुसार 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन के निर्बाध एवं सुचारू संचालन के लिए मुख्य विद्युत आपूर्ति से संबंधित आर्मर्ड केबल को बदला जाना आवश्यक था। इसके साथ ही हेल्पलाइन की तकनीकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से आवश्यक तकनीकी उन्नयन का कार्य भी किया गया। इन कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए हेल्पलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित रहीं। तकनीकी टीमों द्वारा सभी आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। आवश्यक परीक्षण एवं तकनीकी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के बाद अब 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन सोमवार से पूर्ववत नियमित रूप से संचालित होगी।

24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध रहेगी हेल्पलाइन

डॉ. अरीता सक्सेना, नोडल अधिकारी, 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं जानकारी प्राप्त करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अपनी शिकायतें और सुझाव भी दर्ज करा सकते हैं। हेल्पलाइन की सेवाएं पुनः शुरू होने के बाद प्रदेश के नागरिक 104 नंबर पर संपर्क कर निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, परामर्श, शिकायत अथवा हेल्पलाइन से संबंधित अन्य सेवाओं के लिए सोमवार से 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन का निर्बाध रूप से उपयोग किया जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच को आसान बनाती है 104 हेल्पलाइन

डॉ. अरीता सक्सेना, नोडल अधिकारी, 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद एवं सहायता के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में कार्य करती है। दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक भी हेल्पलाइन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने में भी हेल्पलाइन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों और समस्याओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों एवं विभागों तक पहुंचाया जाता है, जिससे उनका नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

 

तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना निर्बाध सेवाओं के लिए आवश्यक

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुचारू और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की विद्युत एवं तकनीकी व्यवस्थाओं का आवश्यक उन्नयन किया गया है। तकनीकी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण से हेल्पलाइन के संचालन को सुचारू बनाए रखने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

असुविधा के लिए खेद, सहयोग के लिए प्रदेशवासियों का आभार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड ने तकनीकी एवं विद्युत संबंधी आवश्यक कार्यों के दौरान 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं प्रभावित होने से प्रदेशवासियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। एनएचएम ने इस अवधि में प्रदेशवासियों द्वारा दिए गए सहयोग एवं धैर्य के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि सभी आवश्यक कार्य पूर्ण होने के बाद सोमवार से हेल्पलाइन सेवाएं पूर्ववत 24×7 उपलब्ध रहेंगी। प्रदेश के नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, आवश्यक जानकारी, शिकायत एवं अन्य निर्धारित हेल्पलाइन सेवाओं के लिए 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं।

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दांत दर्द से हैं परेशान? जानिए घर पर राहत पाने के आसान और असरदार उपाय https://newshindisamachar.com/are-you-troubled-by-toothache-know-the-easy-and-effective-ways-to-get-relief-at-home/ Fri, 10 Jul 2026 07:33:47 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68640 दांतों में अचानक होने वाला दर्द रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना सकता है। कई बार यह दर्द कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन कई मामलों में यह किसी गंभीर दंत समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में दर्द की वजह को समझना और सही समय […]

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दांतों में अचानक होने वाला दर्द रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना सकता है। कई बार यह दर्द कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन कई मामलों में यह किसी गंभीर दंत समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में दर्द की वजह को समझना और सही समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है। हल्के दर्द की स्थिति में कुछ घरेलू उपाय अस्थायी राहत दिला सकते हैं।

आखिर क्यों होता है दांतों में दर्द?

दांत दर्द के कई कारण हो सकते हैं। सबसे सामान्य वजह दांतों में कैविटी बनना है। जब बैक्टीरिया दांत की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हुए अंदर की नसों तक पहुंच जाते हैं, तो तेज दर्द शुरू हो सकता है। इसके अलावा मसूड़ों में संक्रमण, अक्ल दाढ़ निकलना, दांतों में दरार आना या ठंडे-गरम खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता भी दर्द की वजह बन सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार दर्द निवारक दवा लेने की बजाय दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे, सूजन हो या पस निकलने लगे तो तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

हल्के दर्द में अपनाए जा सकते हैं ये घरेलू उपाय

लौंग से मिल सकती है अस्थायी राहत

दांत दर्द के घरेलू उपायों में लौंग का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें मौजूद यूजेनॉल नामक तत्व हल्के दर्द को कम करने और बैक्टीरिया के प्रभाव को घटाने में मदद कर सकता है। दर्द वाले दांत के पास लौंग रखकर धीरे-धीरे चबाना या बहुत कम मात्रा में लौंग का तेल कॉटन की मदद से लगाना कुछ समय के लिए राहत दे सकता है। हालांकि तेल का अधिक उपयोग मसूड़ों में जलन पैदा कर सकता है।

गुनगुने नमक के पानी से करें कुल्ला

गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करना मुंह की सफाई बनाए रखने का आसान तरीका माना जाता है। इससे भोजन के कण और बैक्टीरिया हटाने में मदद मिलती है, साथ ही मसूड़ों की हल्की सूजन भी कम हो सकती है। नियमित कुल्ला करने से संक्रमण बढ़ने की संभावना भी घट सकती है।

लहसुन के एंटीबैक्टीरियल गुण

लहसुन में पाया जाने वाला एलिसिन प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल तत्व माना जाता है। शुरुआती संक्रमण की स्थिति में यह बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करने में सहायक हो सकता है। लहसुन की एक कली को हल्का कुचलकर प्रभावित दांत के पास कुछ देर रखने से कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है।

सूजन होने पर करें ठंडी सिकाई

यदि दांत दर्द के साथ गाल या चेहरे पर सूजन भी हो, तो बर्फ को कपड़े में लपेटकर प्रभावित हिस्से के बाहर हल्की सिकाई की जा सकती है। इससे सूजन और दर्द में अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि यदि दर्द का कारण गंभीर संक्रमण है, तो केवल ठंडी सिकाई पर्याप्त नहीं होती और डॉक्टर से इलाज कराना आवश्यक होता है।

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

अगर दांत का दर्द लगातार कई घंटों या दिनों तक बना रहे, दर्द के साथ बुखार, सूजन या पस दिखाई दे, या खाने-पीने में दिक्कत होने लगे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय तुरंत दंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज कराने से संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

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मानसून में दही खाना सही है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://newshindisamachar.com/is-it-right-to-eat-curd-in-monsoon-or-not-know-what-health-experts-say/ Mon, 06 Jul 2026 10:16:17 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68528 बारिश का मौसम आते ही खानपान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि क्या मानसून के दौरान दही खाना सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे सर्दी-जुकाम और कफ जैसी समस्याएं बढ़ […]

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बारिश का मौसम आते ही खानपान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि क्या मानसून के दौरान दही खाना सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे सर्दी-जुकाम और कफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दही पूरी तरह से नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसका सेवन सही समय और संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।

दही प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाद्य पदार्थ है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, बारिश के मौसम में नमी और तापमान में बदलाव के कारण कुछ लोगों का पाचन कमजोर हो सकता है। ऐसे में दही का अधिक या गलत समय पर सेवन परेशानी का कारण बन सकता है।

दही खाने के प्रमुख फायदे
पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मददगार।
आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक।
शरीर को जरूरी पोषक तत्व और ऊर्जा प्रदान करता है।
किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में दही का सेवन दिन के समय करना बेहतर माना जाता है। रात में दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कुछ लोगों को पाचन संबंधी दिक्कत या कफ की समस्या हो सकती है। दही में भुना जीरा, काली मिर्च या सेंधा नमक मिलाकर खाने से यह अधिक सुपाच्य हो जाता है। साथ ही हमेशा ताजा और घर का बना दही ही खाना चाहिए।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?

जिन लोगों को पहले से सर्दी-जुकाम, अस्थमा, एलर्जी या कमजोर इम्यूनिटी की समस्या है, उन्हें दही का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। यदि दही खाने के बाद किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा।

कुल मिलाकर, मानसून में दही खाना पूरी तरह से वर्जित नहीं है। यदि इसे सही समय, उचित मात्रा और सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। वहीं, किसी भी स्वास्थ्य समस्या या विशेष परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या आहार संबंधी निर्णय के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

(साभार)

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क्या किडनी स्टोन में टमाटर खाना नुकसानदायक है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ https://newshindisamachar.com/is-eating-tomatoes-harmful-for-kidney-stones-find-out-what-experts-say/ Mon, 22 Jun 2026 11:58:54 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68150 टमाटर लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। सब्जियों से लेकर सलाद और सूप तक, इसका इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति को किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या होती है, तो अक्सर उसे टमाटर खाने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती […]

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टमाटर लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। सब्जियों से लेकर सलाद और सूप तक, इसका इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति को किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या होती है, तो अक्सर उसे टमाटर खाने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या टमाटर वास्तव में पथरी बढ़ाने का कारण बन सकता है या यह केवल एक आम धारणा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन कई प्रकार के होते हैं, जिनमें कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन सबसे सामान्य माना जाता है। टमाटर में ऑक्सालेट नामक तत्व थोड़ी मात्रा में पाया जाता है, जो कुछ लोगों में पथरी बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से डॉक्टर कुछ मरीजों को टमाटर का सेवन सीमित करने की सलाह देते हैं, खासकर उन लोगों को जिन्हें बार-बार कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन की समस्या होती है।

टमाटर के बीजों को लेकर भी कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। आमतौर पर माना जाता है कि टमाटर के बीज पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में इस बात के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, जिन लोगों को बार-बार पथरी की शिकायत रहती है, उन्हें एहतियात के तौर पर बीज निकालकर टमाटर खाने की सलाह दी जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर पथरी के मरीज को टमाटर पूरी तरह छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पथरी किस प्रकार की है और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह आहार से हटाना उचित नहीं माना जाता।

किडनी स्टोन की समस्या से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक और प्रोसेस्ड फूड का सीमित सेवन करना, संतुलित आहार अपनाना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी है। साथ ही डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए खानपान संबंधी निर्देशों का पालन करने से पथरी की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या डाइट में बदलाव से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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वजन घटाने के लिए चावल छोड़ना कितना सही? आइये जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ https://newshindisamachar.com/how-advisable-is-it-to-give-up-rice-for-weight-loss-lets-find-out-what-the-experts-say/ Sat, 20 Jun 2026 07:36:24 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68104 वजन घटाने और फिट रहने की चाह में कई लोग सबसे पहले अपनी डाइट से चावल को हटाने का फैसला करते हैं। आम धारणा है कि चावल खाने से वजन बढ़ता है, इसलिए इसे छोड़ना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। हालांकि, पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी […]

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वजन घटाने और फिट रहने की चाह में कई लोग सबसे पहले अपनी डाइट से चावल को हटाने का फैसला करते हैं। आम धारणा है कि चावल खाने से वजन बढ़ता है, इसलिए इसे छोड़ना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। हालांकि, पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ने से पहले उसके शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना जरूरी है। चावल शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है और इसे छोड़ने से फायदे के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

चावल छोड़ने पर शरीर में क्या बदलाव हो सकते हैं?

वजन नियंत्रित करने में मिल सकती है मदद

चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में इसका सेवन कम करने से कुल कैलोरी इनटेक घट सकता है, जिससे कुछ लोगों को वजन कम करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की जीवनशैली और अन्य खानपान की आदतों पर भी निर्भर करता है।

ऊर्जा स्तर में आ सकती है गिरावट

कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। यदि अचानक चावल खाना बंद कर दिया जाए तो कई लोगों को थकान, कमजोरी और सुस्ती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लड शुगर पर पड़ सकता है प्रभाव

कुछ मामलों में चावल का सेवन कम करने से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका परिणाम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और संपूर्ण आहार पर निर्भर करता है।

पाचन तंत्र पर भी दिख सकता है असर

यदि चावल की जगह पर्याप्त फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल नहीं किए जाते हैं तो कब्ज या अन्य पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। विशेषज्ञ संतुलित आहार अपनाने की सलाह देते हैं ताकि पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता रहे।

क्या चावल को पूरी तरह छोड़ना सही है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि चावल को पूरी तरह त्यागने के बजाय उसकी मात्रा और गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक फायदेमंद हो सकता है। सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस, रेड राइस या सीमित मात्रा में चावल का सेवन बेहतर विकल्प माना जाता है।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

डायबिटीज के मरीज, खिलाड़ी, अधिक शारीरिक श्रम करने वाले लोग, बच्चे, किशोर और गर्भवती महिलाओं को अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी अध्ययनों और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। किसी भी प्रकार के आहार परिवर्तन से पहले विशेषज्ञ की राय लेना उचित रहेगा।

(साभार)

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फ्रिज में रखा गूंथा आटा कितना सुरक्षित? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://newshindisamachar.com/%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%82%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf/ Wed, 17 Jun 2026 10:43:02 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=68018 आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग समय बचाने के लिए कई घरेलू उपाय अपनाते हैं। इनमें से एक आम आदत है पहले से आटा गूंथकर फ्रिज में रख लेना और बाद में उससे रोटियां बनाना। हालांकि यह तरीका सुविधाजनक जरूर है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय […]

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आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग समय बचाने के लिए कई घरेलू उपाय अपनाते हैं। इनमें से एक आम आदत है पहले से आटा गूंथकर फ्रिज में रख लेना और बाद में उससे रोटियां बनाना। हालांकि यह तरीका सुविधाजनक जरूर है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक फ्रिज में रखा गूंथा आटा उसकी गुणवत्ता और पौष्टिकता को प्रभावित कर सकता है।

ताजा आटा क्यों माना जाता है बेहतर?

विशेषज्ञों के अनुसार ताजा गूंथे हुए आटे से बनी रोटियां स्वाद और पोषण दोनों के लिहाज से बेहतर होती हैं। लंबे समय तक स्टोर किए गए आटे में मौजूद कुछ पोषक तत्व धीरे-धीरे कम हो सकते हैं। इसके अलावा आटे की ताजगी भी प्रभावित होती है, जिससे रोटी का स्वाद और बनावट बदल सकती है।

स्वाद और गुणवत्ता पर पड़ सकता है असर

गूंथे हुए आटे को कई घंटों तक फ्रिज में रखने पर उसमें ऑक्सीकरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे आटे का रंग, गंध और स्वाद प्रभावित होने की संभावना रहती है। ऐसे आटे से बनी रोटियां ताजे आटे की तुलना में कम स्वादिष्ट महसूस हो सकती हैं।

गलत तरीके से रखने पर बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

यदि आटे को खुला छोड़ दिया जाए या सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने की आशंका बढ़ जाती है। खासकर गर्म मौसम में या अत्यधिक नमी की स्थिति में यह जोखिम और बढ़ सकता है। ऐसे आटे का सेवन करने से पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

पाचन पर भी पड़ सकता है प्रभाव

कई विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक रखा हुआ आटा अपनी मूल संरचना में बदलाव के कारण पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय ले सकता है। इससे कुछ लोगों को गैस, अपच या पेट फूलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

आटा स्टोर करने का सही तरीका

आटे को हमेशा साफ और एयरटाइट कंटेनर में रखें।
फ्रिज में 8 से 12 घंटे से अधिक समय तक रखने से बचें।
जरूरत के अनुसार ही आटा गूंथें।
इस्तेमाल से पहले आटे को कुछ देर सामान्य तापमान पर रखें।
यदि आटे से खट्टी गंध आए या उसका रंग बदल जाए तो उसका उपयोग न करें।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर स्वाद और पोषण के लिए ताजा आटा इस्तेमाल करना सबसे अच्छा विकल्प है। यदि समय की कमी के कारण आटा स्टोर करना जरूरी हो, तो उसे सीमित समय तक और सही तरीके से सुरक्षित रखना चाहिए।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण विशेषज्ञों की सलाह और उपलब्ध रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)

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ब्लड शुगर कंट्रोल करने में कितना असरदार है करेला जूस? जानिए विशेषज्ञों की राय https://newshindisamachar.com/how-effective-is-bitter-gourd-juice-in-controlling-blood-sugar-find-out-what-experts-say/ Tue, 16 Jun 2026 08:03:56 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=67979 ब्लड शुगर की समस्या आज तेजी से बढ़ रही है और यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाइयों के […]

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ब्लड शुगर की समस्या आज तेजी से बढ़ रही है और यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाइयों के साथ स्वस्थ आहार और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

इसी कड़ी में करेला जूस को एक लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है। कई अध्ययनों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में यह दावा किया गया है कि करेला में मौजूद पोषक तत्व शरीर में ग्लूकोज के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसका सेवन चिकित्सकीय सलाह के साथ ही करना चाहिए।

शुगर कंट्रोल में कैसे मदद करता है करेला जूस?

करेला में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में इंसुलिन की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इसमें मौजूद चारेंटिन और पॉलीपेप्टाइड-पी जैसे यौगिक रक्त में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के बीच करेला जूस को काफी उपयोगी माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, करेला अग्न्याशय (पैंक्रियाज) के कार्य को भी समर्थन दे सकता है, जिससे शरीर में इंसुलिन उत्पादन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।

सेवन से पहले बरतें सावधानी

हालांकि करेला जूस के कई संभावित लाभ बताए जाते हैं, लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेने पर ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से काफी नीचे जा सकता है। खासतौर पर वे लोग जो पहले से डायबिटीज की दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, उन्हें करेला जूस को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक उपाय को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय परामर्श के साथ ही डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टों और उपलब्ध शोध के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।

(साभार)

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गर्मी में राहत या बीमारी का खतरा? फ्रोजन डेजर्ट खाने से पहले जान लें ये बातें https://newshindisamachar.com/relief-from-the-heat-or-a-risk-of-illness-know-these-things-before-eating-frozen-desserts/ Mon, 15 Jun 2026 10:25:30 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=67950 आजकल गर्मी के मौसम में आइसक्रीम, कुल्फी, फ्रोजन योगर्ट और अन्य फ्रोजन डेजर्ट का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। स्वाद और ठंडक के कारण ये खाद्य पदार्थ लोगों की पसंद बने हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इनका अत्यधिक सेवन शरीर के लिए कई तरह की […]

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आजकल गर्मी के मौसम में आइसक्रीम, कुल्फी, फ्रोजन योगर्ट और अन्य फ्रोजन डेजर्ट का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। स्वाद और ठंडक के कारण ये खाद्य पदार्थ लोगों की पसंद बने हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इनका अत्यधिक सेवन शरीर के लिए कई तरह की परेशानियां खड़ी कर सकता है। खासतौर पर प्रोसेस्ड फ्रोजन डेजर्ट में मौजूद अधिक चीनी, कृत्रिम फ्लेवर और वसा लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में उपलब्ध कई फ्रोजन डेजर्ट उत्पादों में रिफाइंड शुगर और कॉर्न सिरप का इस्तेमाल किया जाता है, जो रक्त में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ा सकते हैं। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इनका सेवन करने से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा, कम कीमत वाले कई उत्पादों में ट्रांस फैट और हाइड्रोजेनेटेड ऑयल का उपयोग भी किया जाता है। ये तत्व शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को बढ़ाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) को कम करने का काम करते हैं। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज जैसी गंभीर समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है।

फ्रोजन डेजर्ट को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इनमें विभिन्न प्रकार के प्रिजर्वेटिव, कृत्रिम रंग और फ्लेवर मिलाए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन रसायनों का अत्यधिक सेवन लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है तथा लंबे समय में शरीर पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है।

पाचन तंत्र पर भी इन उत्पादों का असर देखने को मिल सकता है। अत्यधिक ठंडे और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से गैस, अपच, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जिन लोगों का पाचन तंत्र पहले से संवेदनशील है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

बच्चों के लिए भी फ्रोजन डेजर्ट का अधिक सेवन नुकसानदायक माना जाता है। अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों की आदत बच्चों में मीठे की लत बढ़ा सकती है, जिससे दांतों की सड़न, मोटापा और एकाग्रता से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्रोजन डेजर्ट का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए और खरीदते समय उसके पोषण संबंधी लेबल को जरूर पढ़ा जाए। साथ ही ताजे फलों, घर पर बने फ्रोजन योगर्ट या कम शुगर वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हो सकता है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य एवं मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या आहार में बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

(साभार)

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बार-बार खाली पेट डकार आना कहीं किसी बीमारी का संकेत तो नहीं? जानिए इसके कारण https://newshindisamachar.com/could-frequent-burping-on-an-empty-stomach-be-a-sign-of-an-underlying-condition-find-out-the-causes/ Thu, 11 Jun 2026 10:28:21 +0000 https://newshindisamachar.com/?p=67863 डकार आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पेट में मौजूद अतिरिक्त गैस बाहर निकलती है। हालांकि, यदि बिना कुछ खाए लगातार डकार आने लगे तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट बार-बार डकार आना पाचन तंत्र में गड़बड़ी, एसिडिटी या अन्य […]

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डकार आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पेट में मौजूद अतिरिक्त गैस बाहर निकलती है। हालांकि, यदि बिना कुछ खाए लगातार डकार आने लगे तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट बार-बार डकार आना पाचन तंत्र में गड़बड़ी, एसिडिटी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।

अक्सर लोग इस समस्या को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यदि डकार के साथ पेट में जलन, भारीपन या दर्द जैसी शिकायतें भी होने लगें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं कि खाली पेट डकार आने के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

पेट में गैस जमा होना

पाचन प्रक्रिया के दौरान शरीर में गैस बनना सामान्य बात है। लेकिन जब लंबे समय तक भोजन नहीं किया जाता, तो पेट में गैस जमा होने लगती है। यही गैस डकार के रूप में बाहर निकलती है। कई लोगों को इसके साथ पेट फूलने और असहजता की समस्या भी महसूस होती है।

बचाव के उपाय

भोजन का समय नियमित रखें।
लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
गैस बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन करें।
एसिड रिफ्लक्स की समस्या

जब पेट लंबे समय तक खाली रहता है, तो उसमें बनने वाला एसिड पेट और भोजन नली को प्रभावित कर सकता है। इस स्थिति को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसके कारण बार-बार डकार आना, सीने में जलन, खट्टे डकार और गले में जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

बचाव के उपाय

खाली पेट लंबे समय तक न रहें।
सुबह हल्का नाश्ता अवश्य करें।
खाली पेट चाय या कॉफी पीने से बचें।
अधिक मसालेदार और तैलीय भोजन कम खाएं।
भोजन के साथ ज्यादा हवा निगलना

कुछ लोगों की आदत होती है कि वे जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं या खाते समय लगातार बातें करते रहते हैं। इसके अलावा च्यूइंग गम चबाना और स्ट्रॉ से पेय पदार्थ पीना भी शरीर में अतिरिक्त हवा पहुंचा सकता है। यह हवा बाद में डकार के रूप में बाहर निकलती है। तनाव और चिंता की स्थिति में भी यह समस्या बढ़ सकती है।

बचाव के उपाय

भोजन धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर करें।
खाते समय जल्दबाजी न करें।
च्यूइंग गम और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन सीमित रखें।
स्ट्रॉ के बजाय सीधे गिलास से पानी पीने की आदत डालें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि बार-बार डकार आने के साथ पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून की उल्टी, निगलने में परेशानी या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। ये किसी गंभीर पाचन संबंधी समस्या के संकेत हो सकते हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है।

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