रक्षा क्षेत्र के लिए 2 सितम्बर ऐतिहासिक दिन : प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2 सितम्बर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के भारत के प्रयासों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। प्रधानमंत्री कल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को देशसेवा में समर्पित करेंगे।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को अपने केरल और कर्नाटक के दो दिवसीय दौरे को लेकर सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि आज और कल क्रमश: केरल और कर्नाटक में कार्यक्रमों में शिरकत करूंगा। इन कार्यक्रमों में शहरी विकास, रक्षा, बंदरगाह, ऊर्जा आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि गतिशील शहर कोच्चि पहुंचने पर वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उसके बाद उन्हें कलाडी गांव में श्री आदि शंकर जन्मभूमि क्षेत्र के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। शाम को कोच्चि में मेट्रो और रेल से जुड़े कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करूंगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कल 2 सितम्बर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के भारत के प्रयासों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। पहला स्वदेश निर्मित और निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत चालू किया जाएगा। नए नये नौसेना ध्वज (निशान) का भी अनावरण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कल, 2 सितम्बर मैं मंगलुरु की अपनी बहनों और भाइयों के बीच रहने की आशा करता हूं। 3800 करोड़ रुपये की प्रमुख परियोजनाओं का लोकार्पण या उनकी आधारशिला रखी जाएगी। ये महत्वपूर्ण कार्य मशीनीकरण और औद्योगीकरण से संबंधित हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 1-2 सितम्बर को कर्नाटक और केरल का दौरा करेंगे। एक सितम्बर को छह बजे सायं प्रधानमंत्री कोचीन एयरपोर्ट के निकट स्थित कालडी गांव में आदि शंकराचार्य की पवित्र जन्मस्थली श्री आदि शंकर जन्म भूमि क्षेत्रम् जायेंगे। दो सितम्बर को 9:30 बजे प्रधानमंत्री कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को देशसेवा में समर्पित करेंगे। उसके बाद प्रधानमंत्री 1:30 बजे मंगलुरु में लगभग 3800 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास करेंगे।

इस पोत को घरेलू स्तर पर डिजाइन किया गया और इसे आईएनएस विक्रांत के नाम से एक विमान वाहक पोत के रूप में विकसित किया गया है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना की अपनी संस्था वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है तथा इसका निर्माण पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड कंपनी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। विक्रांत का निर्माण अत्याधुनिक स्वचालित विशेषताओं से लैस है और वह भारत के सामुद्रिक इतिहास में अब तक का सबसे विशाल निर्मित पोत है।

स्वदेशी वायुयान वाहक का नाम उसके विख्यात पूर्ववर्ती और भारत के पहले विमान वाहक पोत के नाम पर रखा गया है, जिसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह पोत तमाम स्वदेशी उपकरणों और यंत्रों से लैस है, जिनके निर्माण में देश के प्रमुख औद्योगिक घराने तथा 100 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संलग्न थे। विक्रांत के लोकार्पण के साथ भारत के पास दो सक्रिय विमान वाहक पोत हो जायेंगे, जिनसे देश की समुद्री सुरक्षा को बहुत बल मिलेगा।

इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नये नौसेना ध्वज (निशान) का अनावरण करेंगे, जो औपनिवेशिक अतीत से अलग तथा समृद्ध भारतीय सामुद्रिक विरासत के प्रतीकानुसार है।

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