नई दिल्ली। पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने अपनी नयी किताब में भारत के पड़ोसी देश के साथ संबधों को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। विजय गोखले ने अपनी किताब में चीन के बारे में खुलासा किया है कि चीन ने भारत की राजनीति में दखल देने के लिए भारतीय वाम दलों का सहारा लिया था। चीन ने 2007 और 2008 के बीच भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के लिए ‘‘घरेलू विरोध का निर्माण‘‘ करने के लिए भारत में वाम दलों के साथ अपने ‘‘निकट संबंधों‘‘ का इस्तेमाल किया। यह भारतीय घरेलू राजनीति में राजनीतिक रूप से संचालित करने के लिए चीन का पहला उदाहरण था। इस कदम का भारत की राजनीति और कूटनीति पर प्रभाव पड़ा। पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले की नई किताब, द लॉन्ग गेमः हाउ द चाइनीज नेगोशिएट विद इंडिया का हिस्सा है, जिसे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित किया गया था, जिसने हाल ही में स्टैंड हिट किया।
अपने 39 साल के राजनयिक करियर में, गोखले विदेश मंत्रालय की तरफ से चीन डेस्क पर सात साल और पूर्वी एशिया में सात साल बिताए हैं। उन्होंने चीन में भारत के राजदूत के रूप में काम किया है और उन्हें देश के शीर्ष चीन-दर्शकों में से एक माना जाता है। जनवरी 2018 में, उन्होंने विदेश सचिव के रूप में एस जयशंकर की जगह ली और पिछले साल सेवानिवृत्त हुए।
गोखले की पुस्तक में छह विषयों को शामिल किया गया है, जिन पर भारत और चीन ने पिछले 75 वर्षों में बातचीत की – भारत की पीपुल्स रिपब्लिक चीन की मान्यता से लेकर तिब्बत तक, पोखरण, सिक्किम में परमाणु परीक्षण, भारत-अमेरिका परमाणु समझौता और मसूद अजहर की ‘वैश्विक‘ के रूप में सूची संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद शामिल है।
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