नया मुख्यमंत्री कर सके फ्री हैंड से काम, आनंदीबेन की तर्ज पर रुपाणी को प्रदेश की राजनीति से दूर रखने के प्लान पर किया जाएगा काम?

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#क्या विजय रुपाणी को भी आनंदीबेन पटेल की तरह नई जिम्मेदारी के साथ गुजरात के बाहर भेजा जाएगा? ये एक बड़ा सवाल है क्योंकि साल 2016 में जब आनंदीबेन पटेल ने इस्तीफा दिया था तो उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाकर गुजरात के बाहर भेज दिया था।

गांधीनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री पद से विजय रुपाणी की विदाई हो चुकी है। राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद उन्होंने संगठन में कार्य करने की बात कहते हुए बोला कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष के नेतृत्व में जो भी दायित्व मिलेगा उसे अवश्य करूंगा। गुजरात के नए मुख्यमंत्री के नामों को लेकर भी जीतू वाघानी से लेकर मनसुख मंडाविया, नितिन पटेल, पुरुषोत्तम रूपाला के नाम चल रहे हैं। विधायक दल की बैठक आज रात को होने वाली है और जल्द ही जो भी नाम होगा वो सामने आ जाएगा। लेकिन इन सब के बीच क्या विजय रुपाणी को भी आनंदीबेन पटेल की तरह नई जिम्मेदारी के साथ गुजरात के बाहर भेजा जाएगा? ये एक बड़ा सवाल है क्योंकि साल 2016 में जब आनंदीबेन पटेल ने इस्तीफा दिया था तो उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाकर गुजरात के बाहर भेज दिया था।

गुजरात के नए मुख्यमंत्री को लेकर गांधीनगर में बीजेपी मुख्यालय में संगठन मंत्री बीएल संतोष और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल की बैठक चल रही है। जिसके बाद जल्द ही सीएम के नाम पर मुहर लग जाएगी। लेकिन जो भी नया मुख्यमंत्री होगा उसके लिए आगे की राह आसान बनाने और प्रेशर पॉलिटिक्स व आतंरिक गुटबाजी रहित रखने के लिए बीजेपी आलाकमान की तरफ से पूर्व सीएम को प्रदेश से नई जिम्मेदारी के साथ बाहर भेजने के प्लान को अमल में लाया जा सकता है।

1 अगस्त 2016 को फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिये आनंदी बेन ने मुख्यमंत्री पद से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं से आग्रह किया था कि उन्हें पद से मुक्त किया जाए। आनंदी बेन ने फेसबुक पोस्ट पर 75 की उम्र की पार्टी पॉलिसी की दुहाई देते हुए जिम्मेदारियों से हटना चाहा। लेकिन गुजरात के सियासी हलकों में चर्चा ये भी थी कि आनंदी बेन की ये फेसबुक पोस्ट अचानक नहीं आई थी। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने आनंदी बेन को राजी किया था, जिसके बाद ही इस्तीफे की पेशकश सामने आई थी। जिसके बाद विधानसभा चुनाव के कुछ महीने के बाद ही बीजेपी के आलाकमान ने आनंदीबेन पटेल को मध्यप्रदेश का राज्यपाल बना दिया।

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