धर्मनगरी से मिट रही धर्मशालाएं, प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल

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हरिद्वार। धर्ममनगरी हरिद्वार में कभी धर्मालुओं द्वारा तीर्थनगर की भावनाओं एवं आवश्यकताओं के अनुरूप बनवाई गई धर्मशालाओं को खुर्दबुर्द करने का सिलसिला जारी है। अब तक धर्मनगरी की कई इमारतें पाश्चात्य सभ्यता के प्रतीक होटलों के लिए धराशायी कर दी गई हैं। जिसके चलते कभी मंदिरों और धर्मशालाओं के लिए पहचानी जाने वाली तीर्थ नगरी हरिद्वार आज पाश्चात्य संस्कृति के प्रतीक होटलों से पट गई है। होटलों के लिए धर्मशालाओं को ठिकाने लगाने का सिलसिला आजकल भी जारी है।

नया मामला हरिद्वार के विष्णुघाट क्षेत्र का है। जहां सैंकड़ों वर्ष प्राचीन बड़ौदा धर्मशाला को व्यावसायिक इमारत में तब्दील किया जा रहा है। हालांकि धर्मशालाओं के स्वरूप परिवर्तन व बिक्री पर जिला प्रशासन की रोक है। लेकिन भूमाफिया औने पोने में धर्मशालाओं को खरीदकर उन्हें व्यावसायिक में तब्दील कर करोड़ों के वारे न्यारे करने में लगे हैं।
हरिद्वार के विष्णुघाट पर स्थित बड़ौदा धर्मशाला को भी आजकल व्यावसायिक रुप दिये जाने का काम जोर शोर से जारी है। बताया जा रहा है कि धर्मशाला स्वामी ने हरिद्वार विकास प्राधिकरण से धर्मशाला की मरम्मत की अनुमति हासिल कर पूरी धर्मशाला ध्वस्त कर उसे व्यावसायिक होटल में तब्दील कर दिया। पिछले काफी समय से चल रहा होटल निर्माण का कार्य अब अंतिम चरण में है। इस दौरान मरम्मत की अनुमति देने वाले प्राधिकरण ने भी यह सुध नहीं ली कि उसकी मरम्मत की अनुमति पर प्राचीन धर्मशाला को ध्वस्त कर दिया गया है। आसपास के लोगों ने रिहायशी क्षेत्र में धर्मशाला को ध्वस्त कर ऊंची व्यावसायिक इमारत बनाने पर कड़ी आपत्ति की है। आसपास के निवासियों ने इस मामले में मंडलायुक्त को शिकायत कर निर्माण रुकवाने व लापरवाही बरतने वाले एचआरडीए के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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