पीरियड्स आने से पहले क्या आपको भी होने लगती है कब्ज की समस्या तो जान लीजिए क्या है दिक्कत?

News Hindi Samachar

एक उम्र के बाद एक सेहतमंद महिला को पीरियड्स से गुजरना पड़ता है। पीरियड्स के वो 5 दिन हर महिला के लिए परेशानी भरे होते हैं. पीरियड्स के दौरान महिला की गर्भाशय पर एग टूट-टूट कर जो परत बनाते हैं वह अपना साइकल पूरी करने के बाद पीरियड्स के दौरान बाहर निकलती है। पीरियड्स से पहले या उस दौरान शरीर में कई सारे हार्मोनल चेंजेज होते हैं. जिसके कारण इन चेंजेज से होने वाले लक्षण पीरियड्स से पहले दिखाई देते हैं। उसे प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) कहा जाता है. बीजेओजी में साल 2016 में लिखी एक आर्टिकल के मुताबिक एक महिला में प्रजनन की क्षमता पीरियड्स के दौरान 40-90%  दिखाई देता है वहीं कब्ज जैसे लक्षण पीएमएस की निशानी हो सकती है।

पीरियड्स और कब्ज के बीच क्या है कनेक्शन?
पीरियड्स से पहले कब्ज की समस्या आमतौर पर हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण होता है. खास तौर पर प्रोजेस्टेरोन में वृद्धि के कारण होती है. उन्होंने आगे कहा कि यह हार्मोन आंतों सहित चिकनी मांसपेशियों को शिथिल कर देता है. जिससे पाचन धीमा हो जाता है.इसके अलावा एस्ट्रोजन के लेवल में बदलाव से पानी जमा हो सकता है. जिससे मल सख्त हो जाता है और कब्ज हो सकता है।

खराब खानपान के कारण भी होती है पीएमएस की समस्या
स्टेटपर्ल्स पब्लिशिंग के अनुसार पीएमएस बढ़ाने में डाइट का भी बहुत बड़ा योगदान होता है. अगर कोई महिला काफी ज्यादा फास्ट फूड, चीनी से भरपूर ड्रिंक और डीप-फ्राइड फूड आइटम खाती हैं. तो इससे पीएमएस, नींद की कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डाइट में बदलाव से मासिक धर्म से पहले होने वाली कब्ज को काफी हद तक कम किया जा सकता है. फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और फलियों के माध्यम से फाइबर का सेवन बढ़ाने से मल में मात्रा बढ़ती है, जिससे मल आसानी से निकल जाता है. अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहना, क्योंकि यह मल को नरम बनाता है.प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और चीनी का सेवन कम करना, क्योंकि ये फाइबर के सेवन और हाइड्रेशन के स्तर को कम करके कब्ज को बढ़ा सकते हैं।

योग करने से आप कब्ज को एक हद तक कंट्रोल कर सकते हैं
लाइफस्टाइल में बदलाव से मासिक धर्म से पहले के चरण में पाचन स्वास्थ्य को और बेहतर बनाया जा सकता है. इसमें नियमित शारीरिक गतिविधि शामिल है जो पाचन तंत्र को उत्तेजित करती है, मल त्याग को बढ़ावा देती है. तनाव प्रबंधन तकनीक, जैसे योग या ध्यान, भी फायदेमंद हो सकते हैं, क्योंकि तनाव पाचन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है. नियमित रूप से बाथरूम जाने की दिनचर्या बनाना और जाने की इच्छा पर तुरंत प्रतिक्रिया करना कब्ज को और खराब होने से रोकने में मदद कर सकता है।

सही एक्सरसाइज करना है बेहद जरूरी
जब सही व्यायाम चुनने की बात आती है, तो योग और स्ट्रेचिंग जैसी हल्की गतिविधियों की सलाह देते हैं जो आंतों की गति को बढ़ावा देती हैं. योग मुद्राएं जैसे कि बच्चे की मुद्रा या आगे की ओर झुकना, जो पेट के तनाव को दूर कर सकती हैं और पाचन को बढ़ावा दे सकती हैं; और नियमित एरोबिक व्यायाम, भले ही कम अवधि के लिए, जो समग्र पाचन स्वास्थ्य को बढ़ाने और इस समय के दौरान कब्ज को कम करने में मदद कर सकता है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जूनियर इंजीनियर व दलाल को रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

देहरादून। विद्युत विभाग के जेई, परवेज आलम एवं उसके सहयोगी (दलाल) आदित्य नौटियाल को 15000/-रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता की शिकायत पर मंगलवार को सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर देहरादनू की ट्रैप टीम ने परवेज आलम जेई विद्युत विभाग सब स्टेशन हर्बटपुर व उसके दलाल आदित्य नौटियाल निवासी विकास नगर […]
जूनियर इंजीनियर व दलाल को रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

You May Like