सुप्रीम कोर्ट से बनी कमेटी की रिपोर्ट पर क्यों बौखलाया किसान मोर्चा?

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नयी दिल्ली। तीनों कृषि कानूनों की वापसी के करीब चार महीने के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट को लेकर खूब चर्चा हो रही है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 85.7 प्रतिशत किसान संगठन कृषि कानून के समर्थन में थे। जिसके बाद से ही किसान संगठन एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। किसी को इसमें साजिश की आशंका नजर आ रही है तो कोई कृषि कानून को वापस लाने के इरादे को भांप रहा है। किसान नेता राकेश टिकैत ने तो ऐसी किसी भी सूरत में आंदोलन वापस खड़ा करने की चेतावनी भी दे दी है। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है इस रिपोर्ट में और किसान मोर्चा के नेता क्यों इससे इतने नाराज नजर आ रहे हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अशोक घनवत केंद्र सरकार की कठपुतली थे। टिकैत ने ट्वीट किया, ष्तीन कृषि कानूनों के समर्थन में उच्चतम न्यायालय में घनवत की रिपोर्ट ने यह सार्वजनिक कर दिया है कि वह केंद्र सरकार की कठपुतली हैं। केंद्र को चेतावनी देते हुए टिकैत ने रिपोर्ट को लेकर मोदी सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की मंशा इन विधेयकों को गुप्त रूप से वापस लाने की है, इसलिए देश में एक और बड़ा किसान आंदोलन शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
टिकैत ने कल अशोक घनवत द्वारा जारी एक रिपोर्ट के हवाले से यह टिप्पणी की। घनवत ने कहा था कि 73 में से 61 किसान संगठनों ने कृषि कानूनों का समर्थन किया था। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा कि समिति द्वारा निरस्त कानूनों की प्रशंसा महज मजाक नहीं बल्कि निकट भविष्य में कृषि कानूनों को किसी न किसी रूप में वापस लाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समिति ने कृषि कानूनों का विरोध करने वाले एक भी किसान से बात नहीं की है। फिर किस आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई कि किसानों के लिए कानून बहुत अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि साजिश के तहत रिपोर्ट तैयार की गई है। इसलिए हमने पहले दिन से ही इस कमेटी का बहिष्कार किया। समिति ने तब चर्चा की कि किन किसानों के साथ रिपोर्ट तैयार की गई है।

समर्थन में 85.7 प्रतिशत किसान संगठन

आपको याद होगा मोदी सरकार तीन कृषि कानून लेकर आई थी। जिनके खिलाफ एक आंदोलन खड़ा हुआ था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के अध्ययन और आंदोलनकारी किसानों से बात करने के लिए एक पैनल बनाया था। समिति के एक सदस्य अनिल धनवत ने बीतों दिनों रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया समिति ने कानूनों के क्रियान्वयन और रूपरेखा में कुछ लचीलापन लाने का समर्थन किया। हितधारकों के साथ समिति की द्विपक्षीय बातचीत से जाहिर हुआ कि केवल 13.3 प्रतिशत हितधारक तीन कानूनों के पक्ष में नहीं थे। 3.3 करोड़ से अधिक किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 85.7 प्रतिशत किसान संगठनों ने कानूनों का समर्थन किया।

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