बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावक बाध्य नहीं: डॉक्टर आनंद भारद्वाज

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बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावक बाध्य नहीं: डॉक्टर आनंद भारद्वाज

हरिद्वार। मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ आनंद भारद्वाज ने कहा कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल प्रबंधन अभिभावको को बाध्य नहीं कर सकता। इसके लिए अभिभावकों से बातचीत कर रास्ता निकालना होगा। कहा विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने पर दो पालियों में कक्षाएं संचालित की जाएगी। इसके लिए समस्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सूचित कर दिया गया है।

डॉ आनंद भारद्वाज ने कहा कि करोना संक्रमण के बाद दोबारा स्कूल खुलने वाले हैं ऐसे में अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से नए नियमों को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इसके चलते हैं उन्होंने समस्त विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि एक पाली वाले विद्यालयों में विद्यालय का समय 9:30 से 3:30 बजे तक रहेगा।
1:30 बजे के बाद बच्चों को घर जाने की अनुमति दे दी जाएगी। लेकिन शिक्षक विद्यालय में हीं रहकर उन बच्चों की ऑनलाइन टीचिंग करेंगे जो बच्चे विद्यालय में नहीं आ रहे हैं । उन्होंने कहा जिन विद्यालयों में छात्र संख्या बहुत अधिक है तथा कक्षो की संख्या कम है, वहां के प्रधानाचार्य विद्यालय को दो पाली में चलाने का निर्णय ले सकते हैं। दो पाली चलाने की स्थिति में 8:00बजे से 12:00बजे तक और 12:30 बजे से 3:30 बजे तक विद्यालय चला सकते हैं इसका कड़ाई से पालन करें ।

कुछ शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यो के द्वारा विद्यालय के समय के बारे में प्रश्न की जा रही है। इस संबंध में मुझे स्पष्ट उत्तराखंड सरकार की s.o.p. के अनुसार किसी भी अभिभावक को विद्यालय में बच्चे भेजने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। अभिभावकों के द्वारा यह लिखकर दिए जाने के फलस्वरुप कि “मुझे बच्चे को विद्यालय भेजने में कोई आपत्ति नहीं है तथा मैं बच्चे को विद्यालय भेजने में सहमत हूं” तभी बच्चे को विद्यालय में आने की अनुमति दी जाएगी। अतः सभी प्रधानाचार्य पहले दिन आए हुए बच्चों को एक एक कागज पर अभिभावकों की अनुमति का प्रपत्र दे दें, जिससे कि वह अपने अभिभावकों से हस्ताक्षर करा कर अगले दिन विद्यालय में जमा कर दे।

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