जमीनी हकीकत और फैसले लेने के बीच एक डिस्कनेक्ट, 2014 से हम 39 चुनाव हारे: मनीष तिवारी

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नयी दिल्ली। जी-23 के नेताओं ने बुधवार को एक बैठक की थी, जिसमें आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी मौजूद रहे। मनीष तिवारी भी जी-23 नेताओं का हिस्सा है। ये समूह पार्टी में संगठनात्मक बदलावों और सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था की बात कर रहा है। जी-23 की बैठक में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों पर चर्चा हुई और कहा गया कि पार्टी के लिए आगे बढ़ने का यही रास्ता है कि सामूहिक और समावेशी नेतृत्व की व्यवस्था हो। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि पार्टी अब शायद कांग्रेस मुक्त भारत की ओर देख रही है।

बुधवार को हुई जी-23 की बैठक के संदर्भ में पूछा गया कि क्या अब एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं? इस पर मनीष तिवारी ने कहा, पार्टी के 18 वरिष्ठ नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के आवास पर मुलाकात की, होली के कारण कई अन्य नेता इस बैठक में नहीं आ सके। खासकर जब हमने कुछ अहम सुधारों को चिन्हित करते हुए एक खत लिखा था जो पार्टी को दोबारा जीवित करने के लिए जरूरी थे। तब से कांग्रेस 11 राज्यों में हार का मुंह देख चुकी है।

मनीष तिवारी ने कहा कि स्पष्ट रूप से परेशानी तो है-जमीनी हकीकत और फैसले लेने के बीच एक डिस्कनेक्ट है। चुनावों में लगातार कांग्रेस की हार पर उन्होंने कहा, इस बात पर ज्यादा जोर नहीं दिया जा सकता कि कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। हम 2014 और 19 का लोकसभा चुनाव हारे, 2014 से 49 विधानसभा चुनावों में से हमें 39 में हार मिली है। हम केवल 4 चुनाव जीत सके हैं। हम वास्तव में एक गंभीर हालात देख रहे हैं।

उन्होंने कहा, हर सियासी पार्टियां सियासी आंदोलन अंततः एक विचार है। और कांग्रेस का विचार जो इतना पुराना है, वह अब विलुप्त होता नजर आ रहा है। किसी भी सियासी संगठन में पांच जरूरी चीजें होती हैं- आइडिया, लीडरशिप, नैरेटिव, संगठन और संसाधनों तक पहुंच।

उन्होंने कहा जिस नेतृत्व ने 1998 से 2017 तक सोनिया गांधी के रूप में हमारा नेतृत्व किया है, शायद अभी भी कांग्रेस के एक बड़े हिस्से को स्वीकार्य है। लेकिन फिर सोनिया गांधी को अपने पुराने अंदाज में लौटना चाहिए और जवाबदेही के सिद्धांत को लागू करना शुरू करना चाहिए, जो दुर्भाग्य से 2017 से गायब है।

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