क्या राजस्थान के दलित का कोई मानवाधिकार नहीं है?: संबित पात्रा

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भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने लखीमपुर हिंसा को लेकर कहा कि आप देख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में किस प्रकार की राजनीति करने की कोशिश हो रही है। भाजपा ने बार बार कहा है और आज फिर मैं कह रहा हूं कि लखीमपुर खीरी में जो हुआ है वो पूर्णतः दुःखद है और उस पूरे विषय की निष्पक्ष जांच चल रही है।

नयी दिल्ली। लखीमपुर हिंसा को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। कांग्रेस लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश में है। कांग्रेस ने इसके लिए कल पूरे दिन का मौन व्रत भी रखा था। लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसानों के परिवार से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मुलाकात कर चुके हैं। आज खुद प्रियंका गांधी उनके अरदास में शामिल होने गई हैं। इन सब के बीच भाजपा की ओर से कांग्रेस पर जबरदस्त तरीके से पलटवार किया गया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने लखीमपुर हिंसा को लेकर कहा कि आप देख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में किस प्रकार की राजनीति करने की कोशिश हो रही है। भाजपा ने बार बार कहा है और आज फिर मैं कह रहा हूं कि लखीमपुर खीरी में जो हुआ है वो पूर्णतः दुःखद है और उस पूरे विषय की निष्पक्ष जांच चल रही है।

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि किंतु दुःखद है कि जिस प्रकार की राजनीति कुछ राजनीतिक दल कर रहे हैं और वोट की खेती करने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर से गांधी परिवार, प्रियंका जी और राहुल गांधी अपने आप को ब्ींउचपवदे विि क्ंसपज तपहीज के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान के प्रेमपुरा गांव में कुछ दिन पहले एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उसके बाद उसके मृत शरीर को उसके घर के सामने फेंक दिया गया। लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव या बंगाल का कोई नेता वहां नहीं गए।

संबित ने सवाल किया कि राजस्थान का प्रशासन वहां दलितों के साथ हो रही घटनाओं पर कोई कार्यवाई नहीं करता, क्या राजस्थान के दलित का कोई मानवाधिकार नहीं है? उन्होंने कहा कि राजस्थान के हनुमानगढ़ के किसानों पर वहां के प्रशासन ने लाठी-डंडे बरसाए। राजस्थान में किसान, महिलाएं, दलित प्रदर्शन नहीं कर सकते, और आप पूरे देश में जा-जाकर दलितों, किसानों, महिलाओं के ह्यूमन राइट्स के चैंपियन बनते हैं। भाजपा के दुष्यंत गौतम ने कहा कि जिस प्रकार से राजस्थान, झारखंड और अन्य राज्यों में घटनाएं हो रही हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक दल इनका राजनीतिकरण कर रहे हैं। मरने वाली की जाति देखकर, मारने वाले धर्म देखकर या राज्य में किसकी सरकार है, ये देखकर राजनीति की जा रही है।

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