विविधता में एकता यही है भारत की विशेषता: राजनाथ

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नयी दिल्ली। दिल्ली के डीआरडीओ भवन में आजादी का अमृत महोत्सव से संबंधित रक्षा मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के द्वारा यह कार्यक्रम आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया हैं। इसमें सभी विभागों का सम्मिलित प्रयास है। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को बधाई दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना मनुष्य के हृदय की सबसे बलवती भावना होती है। राष्ट्रीय स्वाभिमान को दुनिया की कोई ताकत चुनौती देती है तो उसका मुकाबला करने के लिए हमारे तीनों सेना के जवान तैयार हो जाते हैं और मुंहतोड़ जवाब देते हैं।
उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की यही विशेषता है। कार्यक्रमों में विविधता हो सकती है लेकिन लक्ष्यों में नहीं हो सकती है। कार्यक्रम हमारे लिए अलग-अलग हो सकते हैं। यही हमारे भारतीय संस्कृति की प्राण है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव बनाने के पीछे स्वतंत्रता, स्वाभिमान, संप्रभुता, अखंडता, स्वावलंबन और अमरत्व की भावना है। यदि अमरत्व का कॉन्सेप्ट भारत में न होता तो मैं दावे के साथ कहता हूं कि हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित न होती। देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता भी सुरक्षित नहीं होती। इस बीच उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि 75 साल पहले हम आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे। आज आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। ये सौभाग्य का क्षण है। 75 साल पहले हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने आवश्यकता पड़ने पर पहाड़ों में शरण ली। आज हम उन्हीं पहाड़ों पर पर्वत अभियान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हम शस्त्रों के सबसे बड़े आयातक जाने जाते थे। अब भारत शस्त्रों का नंबर एक आयातक नहीं रहा। भारत को हम आत्मनिर्भर बनाएंगे। इस दिशा में प्रयास चल रहे हैं। हम भारत को आयातक नहीं दुनिया का निर्यातक देश बनाना चाहते हैं।
इस बीच रक्षा मंत्री ने कहा कि अपने राष्ट्र के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले अमर सपूतों को अपनी ओर से शीश झुकाकर नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि अपने सामने इतिहास बनते देखना सौभाग्य की बात होती है। इतिहास का हिस्सा बनना उससे भी बड़े सौभाग्य की बात होती है। पर हमारा यह परम सौभाग्य है, कि हम आजादी के ‘अमृत-महोत्सव’ रूपी इतिहास को न केवल बनते देख रहे हैं, बल्कि इसका हिस्सा भी बन रहे हैं।

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