राजस्थान में तालिबानी शासन, बहुसंख्यक अपने त्योहार मनाने में भी हिचकते हैं

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जयपुर। राजस्थान के करौली में आगजनी और हिंसा को लेकर राजनीति तेज हो गई। राजस्थान के हिंसा प्रभावित करौली में ऐहतियात के तौर पर कफ्र्यू को 10 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। वहीं पूरे मामले पर बीजेपी ने राजस्थान सरकरा को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। बीजेपी की तरफ से कहा गया कि राजस्थान को जलता हुआ देखकर हम चुप नहीं रह सकते हैं। इसके साथ ही बीजेपी ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की तुलना तालिबानी शासन से कर दी है। बीजेपी ने पूरे मामले पर आज प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान में अशोक गहलोत मानव अधिकारों पर चोट कर रहे हैं। क्या हिंदू सिर्फ पिटने के लिए हैं, मुकदमे के लिए ही हैं। क्या उनके मानवाधिकार नहीं हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के बावजूद वो देश के प्रधानमंत्री से हिंसा रोकने की बात करते हैं। राजस्थान में जिस तरह से तुष्टिकरण की राजनीति अशोक गहलोत जी कर रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि राजस्थान में तालिबानी शासन है।

सतीश पूनिया ने कहा कि करौली, राजस्थान के मामले में जुलूस की अनुमति थी, अनुमति के बाद सीएलजी की मीटिंग हुई। जो दोषी थे, वो सीएलजी की बैठक में मौजूद थे। उसके बाद जो हुआ वो आप सभी के सामने है। सतीश पुनिया ने कहा कि पिछले 3 वर्षों में करीब 7 लाख एफआईआर राजस्थान में दर्ज हुई हैं। इसमें मॉब लिंचिंग के मामले, सांप्रदायिक हिंसा भी हैं और खास तौर पर महिलाओं से दुष्कर्म के मामले एक साल में ही 6,337 सामने आए हैं। राजस्थान की शांति को खत्म करने के लिए केवल अशोक गहलोत दोषी हैं। उनकी जो तुष्टिकरण की नीति है, उससे साफ नजर आता है कि उन्होंने खुद बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के नाम से एक पक्ष खड़ा कर दिया है।

सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान पुलिस को कांग्रेस के लोगों की जासूसी के लिए वहां के मुख्यमंत्री ने इस्तेमाल किया। अपने उपमुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा इन्हीं की सरपरस्ती में हुआ। पुलिस को अपनी कुर्सी की सुरक्षा के लिए अशोक गहलोत जी ने लगाया हुआ है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एक निजी कार्यक्रम में सवाई माधोपुर आये। लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री बयान देते हैं कि जेपी नड्डा आये और दंगा भड़काकर चले गए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी को खिसकते हुए देखकर इस तरह की बयानबाजी कर रहे है।

पूनिया ने कहा कि पिछले 3 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखेंगे तो पाएंगे कि राजस्थान में बहुसंख्यक अपने त्योहार मनाने में भी हिचकते हैं, उनको डर लगता है। इसके अनेकों उदाहरण हैं, वो कश्मीर फाइल को देखने से लोगों को रोकने के लिए धारा 144 का प्रयोग कर रहे हैं। राजस्थान के करौली में हुई घटना पर भाजपा नेता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि राजस्थान के अंदर राज्य सरकार तालिबानी सोच के साथ काम कर रही है। पुलिस को घटना की पहली से जानकारी क्यों नहीं थी? वहां 14-15 दुकानों को जलाया गया। मामले में अब तक किसी की गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई है?

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