कर्नल संतोष बाबू को मिला वीरता का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान

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2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष के दौरान शहीद हुए 37 वर्षीय कर्नल बी संतोष बाबू को मंगलवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा एक अलंकरण समारोह में मरणोपरांत असाधारण साहस और नेतृत्व के लिए महावीर चक्र (एमवीसी) से सम्मानित किया गया।

नयी दिल्ली। 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष के दौरान शहीद हुए 37 वर्षीय कर्नल बी संतोष बाबू को मंगलवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा एक अलंकरण समारोह में मरणोपरांत असाधारण साहस और नेतृत्व के लिए महावीर चक्र (एमवीसी) से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली राष्ट्रपति भवन में बाबू की विधवा पत्नी बी संतोषी और मां बी मंजुला ने पुरस्कार प्राप्त किया। राष्ट्रपति ने गलवान के पांच अन्य बहादुरों को भी वीर चक्र (वीआरसी) से सम्मानित किया, जिन्होंने 15 जून, 2020 को संख्यात्मक रूप से बेहतर चीनी सैनिकों का मुकाबला किया। उनमें से चार को मरणोपरांत वीआरसी से सम्मानित किया गया।

मरणोपरांत वीआरसी पुरस्कार विजेताओं में नायब सूबेदार नुदुरम सोरेन (16 बिहार), हवलदार के पलानी (81 फील्ड) नायक दीपक सिंह (16 बिहार) और सिपाही गुरतेज सिंह (3 पंजाब) हैं। हवलदार तेजिंदर सिंह (3 मध्यम) युद्धकालीन सम्मान के एकमात्र जीवित प्राप्तकर्ता थे। क्रूर संघर्ष ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को काफी खराब स्थिति में पहुंचा दिया था। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने शिरकत की। परमवीर चक्र के बाद महावीर चक्र दूसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है।गणतंत्र दिवस 2021 पर इन सभी को पुरस्कार देने की घोषणा की गयी थी, जिसके बाद सरकार द्वारा मंगलवार युद्धकालीन सम्मान दिए गये।

कर्नल बिकूमल्ला संतोष बाबू को मरणोपरांत दिया गया महावीर चक्र

पिछले साल जून में लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के बर्बर हमले के खिलाफ मोर्चे की अगुवाई करने वाले 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी कर्नल बिकूमल्ला संतोष बाबू को मंगलवार को मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया। बाबू के उद्धरण में कहा गया हैः ‘‘दुश्मन सैनिकों की भारी ताकत द्वारा हिंसक और आक्रामक कार्रवाई से निडर होकर, स्वयं से पहले सेवा की सच्ची भावना में अधिकारी ने भारतीय सैनिकों को पीछे धकेलने के दुश्मन के प्रयास का विरोध करना जारी रखा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कर्नल बाबू ने शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपने स्थान पर दुष्मन के हमले को रोकने के लिए पूर्ण कमान और नियंत्रण के साथ सामने से नेतृत्व किया।

गलवान घाटी में शहीद हुए थे 20 सैनिक

कर्नल बाबू 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे, जिन्हें ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के लिए गलवान घाटी में तैनात किया गया था। भारत और चीन पिछले साल मई की शुरुआत से एक सैन्य गतिरोध में शामिल थे। दोनों पक्ष विघटन पर चर्चा कर रहे थे। गलवान घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 के पास सात घंटे के घातक संघर्ष में बीस भारतीय सैनिक मारे गए, जहां भारतीय सैनिकों ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को भारी नुकसान पहुंचाया। 16 बिहार के अलावा 3 पंजाब, 3 मीडियम रेजिमेंट और 81 फील्ड रेजिमेंट के सैनिक पांच दशकों से अधिक समय में वास्तविक नियंत्रण रेखा (स्।ब्) पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पहला घातक संघर्ष में शामिल थे।

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