सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज नहीं, मजबूत इम्युनिटी के लिए पूरी नींद भी जरूरी

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शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ पौष्टिक खाना और नियमित एक्सरसाइज ही काफी नहीं है। पर्याप्त और अच्छी नींद भी मजबूत इम्युनिटी के लिए बेहद अहम मानी जाती है। आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक जागना, मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करना और अनियमित समय पर सोना आम हो गया है। इसका असर केवल अगले दिन की थकान और सुस्ती पर नहीं पड़ता, बल्कि लंबे समय में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

नींद के दौरान शरीर आराम करने के साथ-साथ खुद को रिकवर करने का काम करता है। इस दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी कई प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। इसलिए अगर आप बार-बार नींद पूरी नहीं कर रहे हैं, तो इसका असर आपकी सेहत पर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है।

नींद का इम्युनिटी से क्या कनेक्शन है?

जब हम सोते हैं, तब शरीर में कई ऐसी प्रक्रियाएं चलती हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होती हैं। पर्याप्त नींद शरीर को इन प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद करती है।

एक-दो दिन कम सोने से आमतौर पर बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन अगर नींद की कमी लगातार बनी रहे तो शरीर की सामान्य इम्यून प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि संक्रमण से बचाव के लिए खानपान और एक्सरसाइज के साथ-साथ नींद पर भी ध्यान देना जरूरी है।

कम नींद से बढ़ सकती है संक्रमण की आशंका

शरीर में प्रवेश करने वाले वायरस और अन्य संक्रमणों से मुकाबला करने में इम्युनिटी अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए प्रतिरक्षा प्रणाली का सही तरीके से काम करना जरूरी है। कई अध्ययनों में नींद की कमी और संक्रमण के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध देखा गया है।

खासकर लगातार कम या खराब गुणवत्ता वाली नींद लेने पर सर्दी-जुकाम जैसे संक्रमणों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि देर रात तक जागने की आदत का प्रभाव सिर्फ सुबह की थकान या नींद आने तक सीमित नहीं रहता।

रोज कितने घंटे सोना चाहिए?

वयस्कों के लिए आमतौर पर हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। बच्चों और किशोरों को उम्र के अनुसार इससे ज्यादा नींद की जरूरत हो सकती है।

हालांकि सिर्फ बिस्तर पर बिताया गया समय ही पर्याप्त नहीं है। अगर कोई व्यक्ति 7-8 घंटे सोने के बाद भी लगातार थका हुआ महसूस करता है, रात में बार-बार उसकी नींद खुलती है या लंबे समय से नींद से जुड़ी परेशानी बनी हुई है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

नींद की कमी का सेहत पर व्यापक असर

लगातार कम सोने को केवल इम्युनिटी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। नींद की कमी का संबंध कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी पाया गया है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने से ब्लड प्रेशर, वजन बढ़ने, हृदय स्वास्थ्य और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

इसके अलावा नींद पूरी न होने पर ध्यान लगाने, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में अच्छी नींद को केवल आराम का जरिया मानना सही नहीं होगा। यह शरीर और दिमाग की रोजाना रिकवरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बेहतर नींद के लिए क्या करें?

रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखें।
सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
रात में बहुत ज्यादा कैफीन लेने से बचें।
सोने के कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक रखें।
दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
अगर लंबे समय से नींद की समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लें।

नोट: यह लेख उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी बीमारी या लगातार बनी रहने वाली नींद की समस्या के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

(साभार)

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